Thursday, January 31, 2008

इंपोर्ट का एक्सपोर्ट

पाकिस्तान मे बहुत समय से एक चीज़ बडे एअतियात से बनई जा रही है बनाने वाले उसे जिहाद कहते है बाकी दुनिया आतंकवाद पाकिस्तान मे यह माल खास एक्सपोर्ट के लिए तैयार किया जा रहा है कुछ समय पहले हालात बदले तो उन्हें लगा कि इस माल कि जरुरत तो अपने मुल्क मे भी है ऐसे मे वे माल जो वी सिर्फ एक्सपोर्ट के इरादे से बना रहे थे उसे अपने मुल्क मी भी खपाने लगे


इसे कहते है एक्सपोर्ट का इंपोर्ट


जेहादियों कि एक बात तो माननी पडेगी वे जो कुछ करते है बड़ी लगन से करते है अपने माल कि क्वालिटीमे वे कोई समझौता नही करते हमेशाबढ़िया से बढ़िया माल सप्लाई करते है आतंकवाद बहुत ही उन्नत बाज़ार है साधारण बाज़ार सेल के मौसम मे ज्यादा से ज्यादा एके के उप्पर एक माल मुफ्त देता है परन्तु आतंकवाद ऐसे छोटी मोटी सेल नही लगाता किसे एक को मारने जाता है तो साथ मे दस बीस मुफ्त मी मार आता हैकोई दूसरा दुकानदार दस बीस मुफ्त मी नही देता परन्तु आतंकवाद के दुकानदार देते है आजकल गलोब्लिजेशन का ज़माना है बाकी दुनिया व्यापार का ग्लोब्लिज़शन कर रही है कठमुल्ले जेहाद का कर रहे है वह न सिर्फ आतंकवाद बनने मी एक्सपर्ट है बल्कि उसका एक्सपोर्ट करने मे भी एक्सपर्ट है जी हाँ वे जब चाहे आपके यहाँ होम डिलिवरी कर सकते है आतंकवाद ऐसा मुफ्त का माल है जिसिकी डिलिवरी आपको न चाहते हुए भी लेने पड़ते है
लोग ज़हिडियो को पिछ्रा समझते है यह बहुत गलत बात है ज़हादी सोच मे जितना पीछे हू आतंकवाद मे बिल्कुल भी पीछे नही है वे आधुनिकतम टेक्नोलॉजी का इस्तमाल करते है वे आधुनिक विचारो कि जानकारी भले न रख्तो हू लेकिन आधुनिक हथिरो कि जानकारी ज़रूर रखते है दूसरो के विचार आपनाने मे उनकी सोच आरे आती है दूसरो के हथियार आपनाने मी वही विचार आरे नही आती इस सोच को क्या नाम देना चहिये
अमेरिका और eeurope के लोगो को एक चिंता बारे ज़ोर से सता रही है कल को पाकिस्तान के परमाणु बम ज़हिदेओ के हाथ लग गए तो?लग तो सकते है पेर उससे डरने कि कोई ज़रूरत नही है आतंकवादी अपने बम का इस्तेमाल अपने घर मी भी कर सकते है आप कहेंगे यह तो निहायत ही बेहुकुफी वाला इएडिया है जी हाँ,है,लेकिन क्या आप आतंकवादियो से आक्ला के इस्तमाल कि उम्मीद कर सकते है

Thursday, January 24, 2008

राजपथ से नहीं गुजरी थी पहली परेड

नई दिल्ली- भारतीय गणतंत्र की 58 वीं वर्षगाँठ पर रक्षा मंत्रालय ने अपने पुराने दस्तावेज जारी कर इस धारणा को गलत साबित किया है कि 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र की पहली मुख्य परेड राजपथ से होकर गुजरी होगी।
गत अगस्त में मंत्रालय ने अपने ऐतिहासिक दस्तावेज से इस बात का भी खुलासा किया था कि आजादी के बाद पहली बार लाल किले पर तिरंगा 15 अगस्त को नहीं बल्कि 16 अगस्त 1947 को फहराया गया था। रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रकाशित किए जाने वाले 4 फरवरी 1950 के फौजी अखबार में उस ऐतिहासिक दिन का ब्यौरा दिया गया है जब भारतवासी देश को गणतंत्र घोषित किए जाने से गर्वातिरेक में डूबे हुए थे।भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने इर्विन स्टेडियम में सशस्त्र बलों की भव्य परेड की सलामी ली थी और 31 तोपों ने गरज गरज कर दुनिया को संदेश सुनाया था कि अब भारत की सरकार भारत के लोग बनाएँगे और वह भारतवासियों की अपनी और उनके लिए बनने वाली सरकार होगी।फौजी अखबार इतिहास दर्ज करते हुए लिखता है कि 1950 में जनवरी के 26वें दिन बृहस्पतिवार को सुबह दस बजने के अठारह मिनट बाद भारत को संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया। उसके इसके छह मिनट बाद बाबू राजेंद्र प्रसाद को गणतांत्रिक भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई।उस समय गवर्मेंट हाउस कहलाने वाले मौजूदा राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में राजेंद्र बाबू के शपथ लेने के बाद दस बजकर 30 मिनट पर तोपों की सलामी दी गई। उनका कारवाँ दोपहर बाद ढाई बजे गवर्मेंट हाउस से इर्विन स्टेडियम के लिए रवाना हुआ। राजेंद्र बाबू पैंतीस साल पुरानी लेकिन विशेष रूप से सुसज्जित बग्गी में सवार हुए जिसमें छह बलिष्ठ ऑस्ट्रेलियाई घोड़े जुते हुए थे।इस कारवाँ को देखने के लिए सड़कों पर अपार जन समूह उमड़ पड़ा था और लोक मकानों की छतों, पेड़ों शाखाओं और हर सम्भव ऊँचाई वाले स्थानों पर आ जमे थे। इर्विन स्टेडियम में हुई मुख्य परेड को देखने के लिए 15 हजार लोग मौजूद थे। फौजी अखबार के अनुसार इस परेड में नौसेना, इन्फेंट्री, कैवेलेरी रेजीमेंट, सर्विसेज रेजीमेंट के अलावा सेना के सात बैंड भी शामिल हुए थे।गणतंत्र की पहली परेड की शोभा बढ़ाने के लिए इंडोनेशिया के प्रसिद्ध नेता सुकर्णो आए थे। उस समय इंडोनेशिया का नाम युनाइटेड स्टेट्स ऑफ इंडोनेशिया हुआ करता था।

मोदी की मुंबई रैली से हिल गए हैं ठाकरे -

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिन पहले मुंबई में हुई रैली से शिवसेना को तगड़ा झटका लगा है। उसे लगने लगा है कि महाराष्ट्र में भाजपा अब अधिक दिनों तक उसे बड़े भाई की भूमिका में नहीं रहने देगी। पार्टी सुप्रीमो बाल ठाकरे ने तो बुधवार को कह भी दिया कि महाराष्ट्र में मोदी और मायावती पैटर्न की राजनीति नहीं चल पाएगी।
महाराष्ट्र में करीब 20 साल से चले आ रहे शिवसेना-भाजपा गठबंधन में शिवसेना अब तक बड़े भाई की भूमिका निभाती रही है। इसी रिश्ते के तहत राज्य की 288 विधानसभा सीटों में से शिवसेना 171 एवं भाजपा 117 पर चुनाव लड़ते रहे हैं। भाजपा की जीत का प्रतिशत शिवसेना से बेहतर रहता है लेकिन सीटों की संख्या में शिवसेना बाजी मार लेती है। गठबंधन की शर्त है कि जिसकी सीटें ज्यादा होंगी मुख्यमंत्री उसी का बनेगा, इसलिए भाजपा मुख्यमंत्री पद की दावेदार भी नहीं बन सकती। भाजपा पिछले दो विधानसभा चुनावों से शिवसेना पर दबाव बना रही है कि दोनों दल बराबर सीटों पर चुनाव लड़ें। शिवसेना लोकसभा में कुछ सीटें भाजपा को अधिक देकर विधानसभा में उसे ठेंगा दिखाती आ रही है। भाजपा इसे इसलिए बर्दाश्त करती रही क्योंकि महाराष्ट्र में बाल ठाकरे जैसा करिश्माई नेता उसके पास नहीं था। मगर बीते रविवार को शिवसेना मुख्यालय के ठीक सामने उसी शिवाजी पार्क में नरेंद्र मोदी को सुनने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी जहां ठाकरे पिछले 40 साल से शिवसेना की रैलियां करते आ रहे हैं। इसी पार्क को नवंबर के अंतिम सप्ताह में मायावती ने भी भर दिया था। भाजपा ने अपनी रैली में शिवसेना को तो बुलाया भी नहीं। मोदी को तालियां भी ठाकरे की तुलना में कम नहीं मिलीं। मतलब यह कि भाजपा को मिशन-2009 के लिए नया तारणहार मिल चुका है। वह एक दिन में छह-सात रैलियां भी कर सकता है। दूसरी ओर शिवसेना प्रमुख की गिरती सेहत के कारण अब वे एक रैली में भी लंबे समय तक बैठ नहीं पाते। भाजपा नेता उन्हें आज भी महाराष्ट्र के शिवसेना-भाजपा गठबंधन का पितृ पुरुष मानते हैं। लेकिन सच्चाई यही है कि 2009 के लोकसभा-विधानसभा चुनावों में मोदी की जरूरत भाजपा के साथ-साथ शिवसेना को भी पड़ सकती है।

Sunday, January 20, 2008

रोजगार गारंटी से भी नही रूक रहा पलायन

राज्य बढाना चाहते है रोजगार के दिन
रोजगार गारंटी योजना को लागु करने में तमाम दिक्कतो के बीच एक हैरान करने वाला सच यह भी है कि यह योजना अपने मुख्य उद्देश्य ग्रामीण बेरोजगारो का पलायन रोक पाने मे भी कामयाब नही हो रही है। कई राज्यो ने इस सम्बंध मे ग्रामीण विकास मंत्रालय को सुचित कर के योजना के लिए निर्धारित समय सौ दिन की सीमा को बढाने की मांग की है। मंत्रालय के सुत्रो की माने तो राजस्थान मध्य प्रदेश छत्तीसगढ सहीत कई राज्यो मे पलायन की समस्या परकाबु नही पाये जाने की बात उभर कर सामने आयी है। हाल ही मे कई राज्यो ने मंत्रालय को योजना के अंतर्गत आ रही दिक्कतो से अवगत कराया है। राजस्थान ने तो केन्द्र सरकार को पत्र लिख कर आदीवासी इलाको मे रोजगार गारंटी दिवस सौ से बढाकर दो सौ दिन करने की मांग की है। लेकिन केन्द्र सरकार इस पर आगे बढने की स्थिती मे नजर नही आ रही है।
सरकार को सौ दिन रोजगार देने मे ही कई तरह के पापड बेलने पड रहे है। ऐसे मे दो सौ दिन रोजगार देने के स्थिती दूर दूर तक नही है।

Friday, January 18, 2008

क्यूँ नींद नहीं आती रात भर...

ऐसे लोगों को वाक़ई ख़ुशनसीब कहा जा सकता है जो रात भर पूरी नींद लेने के बाद सुबह सीधे अलार्म घड़ी की टिक-टिक होने पर ही जागते हों लेकिन अलार्म घड़ी की यही टिक-टिक तब दुश्मन की तरह लगती है, जब आपकी रात करवटें बदलते बीती हो या फिर कई कारणों से नींद ही न पूरी हो पाई हो.
और जब नींद पूरी नहीं होती तो ज़ाहिर है, दिन ऊँघते हुए या थकान भरी उकताहट के साथ बीतता है.
कई लोगों के साथ सोते वक़्त बार-बार नींद टूटने का अहम कारण 'ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्नोया' (ओएसए) होता है.
इसे नींद में ख़लल डालने वाली बीमारी कहा जा सकता है.
कारण
इस बीमारी में गले के भीतर सांस लेने का स्थान लगातार संकरा होता जाता है और सोते वक़्त ये लगभग बंद होने लगता है.
इससे सांस की हवा फेफड़ों तक नहीं पहुँच पाती और मष्तिष्क में ऑक्सीजन की लगातार कम होती मात्रा से व्यक्ति की नींद अचानक खुल जाती है.
माना जाता है कि खर्राटे लेने वाले लोग ही अधिकतर इस बीमारी के शिकार होते हैं और वे रात में बमुश्किल तीन घंटे की नींद ले पाते हैं.
नींद नहीं आने से परेशान लोगों की तादात में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है.
स्कॉटलैंड के शहर एडिनबरा स्थित एक अस्पताल में निद्रा औषधि विभाग के डॉक्टर टॉम मैके के मुताबिक़ इस समस्या के बारे में अभी कई चीज़ों का पता नहीं चल पाया है.
उन्होंने बताया कि स्कॉटलैंड में इससे प्रभावित ऐसे लगभग 40 हज़ार लोग हैं जो खुद नहीं जानते कि वे ओएसए यानी नींद में ख़लल डालने वाली बीमारी के शिकार हैं.
मैके के अनुसार, इसका ठीक ठीक पता इसलिए नहीं चल पाता क्योंकि लोग खर्राटे लेने, सांस लेने में बाधा और दिन में ऊँघते रहने जैसी समस्याओं के कारणों के बारे में ठीक-ठीक नहीं जानते.
लेकिन ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवा के एक बोर्ड ने इस बीमारी से परेशान लोगों के लिए कुछ कारगर इलाज का दावा किया है.
इलाज
इस बीमारी से प्रभावित लोगों का घर से अलग आरामदायक होटल में इलाज किया जाता है.
चिकत्सकों अनुसार, इलाज के लिए मरीज़ को होटल के बेडरूम में रखा जाता है जहाँ उसके सारे परीक्षण सहूलियत से किए जा सकते हैं.
मरीज़ों से बातचीत करने के बाद उन्हें इलाज के लिए विशेष किट दी जाती है और इसे इस्तेमाल करने का तरीक़ा बताया जाता है.
रात में सोते वक़्त इस किट को लगाने के बाद सुबह नतीजों का परीक्षण किया जाता है. यदि ओएसए की समस्या हुई तो मरीज़ो को सीधे सांस संबंधी समस्या के लिए दवा दे दी जाती है.
उन्होंनें बताया कि सोते समय एक किट का एक छोटा सा मास्क पहनना होता है जिससे पहले एक या दूसरे दिन ही 80-90 फ़ीसदी लोगों को अच्छी नींद आना शुरू हो जाती है.

Thursday, January 17, 2008

स्पेस में मिले जिंदगी के सूत्र

खगोलविदों ने धरती से 25 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर की आकाशगंगा में जीवन के लिए जरूरी तत्व खोजने का दावा किया है। उनका कहना है कि ये 2 तत्व हैं मेथानिमाइन और हाइड्रोजन सायनाइड। इनसे मिलकर ही जीवन का मुख्य आधार अमीनो एसिड बनता है। यह खोज की है प्योर्तो रीको की अरेसिबो अब्जर्वेटरी के खगोलविदों ने। उन्होंने एआरपी-220 नामक आकाशगंगा में अमीनो एसिड बनाने वाले ये तत्व खोजे। साइंस डेली से बातचीत में इस रिसर्च से जुड़े खगोलविद इमैनुअल मोमाजिन कहते हैं, हमने इन 2 तत्वों को बहुत दूर खोज निकाला, जो यह साबित करता है कि वहां ये तत्व भारी मात्रा में मौजूद हैं। इससे साबित होता है कि जहां भी नए तारों और ग्रहों का जन्म हो रहा है, वहां जीवन के आधारभूत तत्व बड़ी तादाद में हैं। यह अचंभे की बात है। अब्जर्वेटरी के रिसर्चर तापसी घोष कहते हैं कि हम किसी खास चीज को टारगेट करके खोज नहीं कर रहे थे। इसलिए हम यह भी नहीं जानते थे कि हम क्या पाने वाले हैं। हमने बस खोजना शुरू कर दिया और हमने बहुत एक्साइटिंग चीज पाई। खगोलविदों ने एआरपी-220 आकाशगंगा पर ध्यान इसलिए केंद्रित किया कि यह काफी तादाद में नए तारों का निर्माण करती है। इस खोज में दुनिया की सबसे बड़ी और सर्वाधिक संवेदनशील रेडियो टेलिस्कोप का इस्तेमाल किया गया। रिसर्चरों जब विशिष्ट फ्रीक्वेंसी के रेडियो उत्सर्जन की खोज कर रहे थे, उसी दौरान इन दोनों तत्वों का पता लगा। जिस तरह हर व्यक्ति का अपना फिंगरप्रिंट होता है, उसी तरह हर रासायनिक तत्व की अपनी-अलग रेडियो फ्रीक्वेंसी होती है।

कोइराला बनाते थे जाली नोट

काठमांडू : नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने माना है कि 70 के दशक में वह नकली भारतीय करेंसी बनाने वाले गिरोह के साथ थे। यह काम उन्होंने तब किया था जब देश निकाले के दौरान वह भारत में थे। एक वीकली टीवी शो में कोइराला ने इंटरव्यू में ये चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस शो में कोइराला की राजनीतिक गतिविधियों पर एक इंटरव्यू सीरीज चलाई जा रही है। इस इंटरव्यू के दौरान कोइराला ने यह भी खुलासा किया है कि तब के भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के चीफ आर. एन. काओ ने उन्हें नेपाली एयरलाइन के एक प्लेन को हाइजैक करने के लिए हरी झंडी दी थी। कोइराला का कहना है कि रॉ के चीफ ने उन्हें आश्वासन दिया था कि इस हाइजैकिंग उन पर कोई आंच नहीं आएगी। गौरतलब है कि कोइराला उस टीम के नेता थे जिसने 1973 में बिराट नगर से काठमांडू जा रही एक फ्लाइट को हाइजैक किया था। हालांकि रॉ के बारे में इस टिप्पणी के हिस्से को टीवी इंटरव्यू से अलग कर दिया गया।
गिरिजा प्रसाद कोइराला ने ये भी बताया कि जाली नोट बनाने से उनके जुड़े होने की बात नेपाल के पहले प्रधानमंत्री बी. पी. कोइराला भी जानते थे। गिरिजा प्रसाद कोइराला बी. पी. कोइराला के छोटे भाई हैं।
कोइराला ने बताया कि जाली नोटों के कारोबार से जुड़े लोगों से वह पहली बार बिहार के फोर्ब्सगंज में मिले थे। जब कोइराला को तसल्ली हो गई कि ये जाली नोट नहीं पहचाने जाएंगे तब उन लोगों को अपने साथ मिला लिया। कोइराला ने बताया कि जाली नोट पटना में कभी भागलपुर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और राज्य सभा के सदस्य रह चुके डॉ. देवेंद्र सिंह के घर भी ले जाए गए थे। डॉ. सिंह बी. पी. कोइराला के दोस्त रह चुके थे। गिरिजा प्रसाद कोइराला ने बताया कि जाली नोटों का यह कारोबार तंगी में रह रहे नेपाली कांग्रेस के पार्टी कार्यकर्ताओं को मदद पहुंचाने के लिए किया गया था।